Monday, January 23, 2017

Amarkantak tour ; bhopal

शहडोल से बार बार मेरे मित्र अनंत तिवारी का फौन रहा था और मैं भी उनसे मिलने को व्याकुल हो रहा था क्यूं कि वो आदिवासियों के मसीहा हैं और मुझे उनके बारे में काफी कुछ जानकारी दे सकते थे। इससे पहले कि भोपाल से आगे की यात्रा का वर्णन करूं, आपको बता दूं कि भोपाल में दो घनघोर हिन्दू मित्रों ने मुझे अपने घर आने का बुलावा भेज दिया और साथ ही चेतावनी भी दे दी कि आने पर मुंडी उडा दी जायेगी। जब वृदांवन में रहना है तो राधे राधे कहना ही पडता है। 
इन भंयकर बाले हिंदुओं से पंगा कौन ले इसलिये पहुंच गया भाई गोविंद सिंह के पास। मैं जब अपने मित्र बीमारी के साथ गोविंद के घर पहुंचा तो उस समय गोविंद खेतों पर था। बीच शहर में सौ बीगा खेत के मालिक का इकलौता लौंडा हो तो वो कट्टर बन ही जाता है। गोविंद की खतरनाक खतरनाक पोस्ट पढ कर लगा था कि भयानक रुप से बौडी बिल्डर लम्बा चौडा दो चार रायफल टांगे मुस्टडों के साथ ठाकुर साहब खुली जीप में खेतों का मुआयना कर रहे होंगे पर हमारा फौन पाने के पांच मिनट बाद ही वाईक पर एक सिगंल सिलैन्डर बौडी सींकिया पहलवान एकदम मानो हाल ही में आयातित ढाईसौ ग्राम का जवान लौंडा हवा में लहराता हुआ हमारे पास रुका और कसम से ऐसा शर्मा कर गले मिला कि लडकियां भी रंज करने लगें। मैं सोचा शायद थोडी देर में इसकी गाडी रमा होगी पर इसने तो शर्माने में सभी लडकियों के रिकार्ड तोड दिये। फेसबुक पर तो ये ऐसे दहाडता है मानो कि सारे मुल्लों को कल ही पाकिस्तान भेज देगा पर अब क्या हुआ इसे ? एक घनघोर सैकुलर को देखकर इसका खून क्यूं नहीं खौल रहा ? हहहहहह ऐसी ही होती है बास्तविक जिंदगी। बहुत प्यार और बहुत अपनापन मिला मुझे इस कट्टर ठाकुर से। और सबसे बडा सैकुलर का प्रमाण इसी के गांव में मुझे ये मिला कि इसके घर से चार कदम पर बिल्कुल ठीक आमने सामने मंदिर और मस्जिद हैं और लोग बहुत ही प्रेम मुहब्बत से एक दूसरे के इवागतखानों में आते जाते हैं। बिना मजहब का ध्यान रखे सभी छोटे अपने बडे बुजुर्गों को चचाजान और बाबा कह कर पुकारते हैं एक दूसरे के सुख दुख में शामिल होते हैं।

यदि दिल की बात कहूं तो हिन्दुस्तान में कोई कट्टर हो ही नहीं सकता। सर्व धर्म सम भाव तो हमारे खून में है। फेसबुकिया शेर भी हकीकत में एक दूसरे के लिये मर मिटते हैं वो बात अलग है कि टाईमपास करने के लिये एक दूसरे पर दहाडना भी पडता है।
भोपाल के ठाकुर गोविंद का तीया पांचा करने के बाद अब शहडोल चलते हैं और आपको मिलाते हैं अनंत तिवारी से जिसे शहडोलवासी मुहब्बत में खूंचू तिवारी कहते हैं।



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