Monday, July 10, 2017

आसाम मेघालय यात्रा : चेरापूंजी के झरने

मौसमेई गुफा से मौसमेई ईको पार्क का दस मिनट का रास्ता है। यहां टिकट नहीं लगी। स्कूटी खडी की और सामने फैले हुये विशाल पहाडी मैदान की तरफ बढ चले। इसमें जगह जगह पर बहते हुये जल को रोक कर वाटर पार्क बनाया हुआ है। बच्चों के लिये झूले भी है। यही पानी बहते हुये आखिर में गहरी खाई में गिरता है और शानदार जलप्रपात का रूप ले लेता है। यहां से खडे होकर सामने दूर दूर तक फैली हुई हरी भरी घाटियां और उनमें उमडते घुमडते बादलों को देखना गजब का ऐहसास कराता है। यहीं से सामने एक और फाल्स नजर आते हैं " सेवन सिस्टर फाल्स " । बहुत ही खूबसूरत नजारा है। सूरज ढलने लगा। सर्दी भी बढने लगी। बारिश तो नहीं हुई लेकिन तैयारी पूरी थी। जल्दी से रूम लेना ठीक रहेगा सोच कर थोडा आगे बढे तो देखा एक फुटबाल टाईप की वाटर टैंक के सामने एक होम स्टे है। हजार रुपये में डबल रूम। खाना खा ही चुके थे। रूम में घुसे ही थे कि बारिश शुरू। ऐसी शुरू हुई कि सुवह के छ बजे तक पडती रही। सुवह आसमान एकदम साफ।जल्दी ही स्नान कर निकल पडे रामकृष्ण मिशन मंदिर / विद्यालय और फिर नोहकालीकाई फाल्स की तरफ।
रामकृष्ण मिशन के गेट पर पहुंचे ही थे कि बारिश शुरू हो गयी। विद्यालय का तो समय नहीं हुआ था इसलिये बच्चे नहीं थे स्कूल पूरा खाली था। मंदिर में ऊपर एक विशाल कक्ष जिसमें गुरूजी की तस्वीर लगी हुई थी और तीन भक्त बैठ कर पाठ कर ुरहे थे। आरती में समय ज्यादा लगता हुआ देखकर हम तो निकल पडे प्रांगण की तरफ किसी को ढूंढने जिससे ज्ञानार्जन कर सकूं। पूरा कैंपस सुनसान। बारिश ने ठंड बढा दी थी। बाहर निकल कर चाय नास्ता किया और निकल पडे नोहकालीकाई झरने की तरफ जो उसी रोड पर पांच किमी आगे था। ये पांच किमी का सफर चेरापूंजी यात्रा का सबसे बेहतरीन सफर था। पूरे पांच किमी में एक भी मकान या रिहायस नहीं। दूर दूर तक फैले हरे भरे पठार। ऊपर से रिमझिम बारिश । ठंडी ठंडी हवा के झोंके। संकरी सी रोड । थोडी सी भी लापरवाही हो जाये तो चले जायें सीधे गहरी खाई में। इसी बीच कुछ विदेशी घुमक्कड दोस्त भी मिले जो पैदल ही झरनों की तरफ बढ रहे थे। झरनों के पास पहुंचे तो एक लडके ने बीस रुपये का टिकट काट दिया और उसी के होटल के सामने हमने अपनी स्कूटी खडी कर दी। उस होटल के पीछे ही गिर रहा था चेरापूंजी का सबसे खूबसूरत झरना नोहकालीकाई । ये झरना भारत का सब से ऊंचा झरना माना जाता है। यह 1,100 फुट से नीचे गिरता है। जैसे जैसे आप इस झरने के करीब पहुंचते हैं, ऊंचाई से गिरते पानी की आवाज आप के कानों में गूंजने लगती है और पानी को गिरता देख उस में डुबकी लगाने का दिल करने लगता है। झरने के ठीक सामने व्यू पौइंट से झरने की खूबसूरती देखते ही बनती है। अगर आप झरने को और करीब से देखना चाहते हैं तो पत्थरों व पहाड़ों की सहायता से चढ़ कर आसपास के कई छोटे झरनों को पास से देख सकते हैं, भीगने का आनंद ले सकते हैं, पत्थरों पर चढ़ कर फोटो भी खिंचवा सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे, यहां थोड़ी फिसलन होती है। इस की खूबसूरती देखते ही बनती है। कोहरे से निकलते बादलों की नम हवा ऐसा महसूस कराती है मानो आप आसमान में हैं। झरने से गिरता पानी और आसपास का दृश्य पूरी तरह से आप को सुकून पहुंचाने वाला होता है। यहां झरने के पास ही बांस से बने खिलौने बिकते हैं जो काफी अलग होते। स्थानीय स्मृति चिह्नित वाली चीजें भी मिलती हैं। आप ने हमेशा छोटेछोटे टुकड़ों में दालचीनी देखी होगी लेकिन यहां दालचीनी छड़ी के रूप में मिलती है। नोहकालीकाई नामक स्थान पर बहुत चौडा पठारी भाग है जो चारों ओर से एक गहरी घाटी से जुडा है। आपके पास यदि समय है तो यहां चहलकदमी कीजिये। स्वर्ग यहीं दिख जायेगा। रिमझिम बारिश में हम पूरा एक चक्कर लगा आये लेकिन तेज हवाओं ने हमें होटल में घुसने पर मजबूर कर दिया। थोडी हवायें कम हुई और हम निकल पडे बापस गुवाहाटी की ओर । मेघालय ने तो हमारा दिल जीत लिया। अगली बार फिर आयेंगे । इस बार दो नहीं पूरे दस दिन यहीं बितायेंगे। मेघालय ऊंचे-ऊंचे चीड़ के पेड़ों और बादलों का एक अंतहीन सिलसिला है। आप शहरी पागलपन से दूर सुखद जीवन की अनुभूति चाहते हैं तो मेघालय की यात्रा कीजिए।मेघालय में आप ताजा पहाड़ी हवा में सांस ले सकते हैं। अपनी आत्मा को ऊंचे चीड़ के पेड़ों की सरसराहट वाली हवा में खो जाने दीजिए। आपने आखिरी बार पानी की कलकल ध्वनि कब सुनी थी ? मेघालय में सबकुछ है- ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से नीचे गिरते झरने या अनदेखी गुफाएं या पृथ्वी की सबसे गीली जगह- चेरापूंजी जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है।बीहड़ इलाकों में प्राचीन बस्तियों की झलक आपको यहां मिलेगी। आधुनिकताओं से अछूते विनम्र आदिवासियों के आकर्षक जीवन से दोस्ती करने का अवसर। भारत के बाकी हिस्सों के विपरीत यहां का आदिवासी समाज मातृसत्तात्मक है। आदिवासी उत्सवों के दौरान मेघालय आयेंगे यहां काफी कुछ देखने को मिलेगा। मिथकों और किंवदंतियों का इतिहास और धर्म के साथ तालमेल। रंगीन उत्सव में भाग लेते आदिवासी। मेघालय भारत के सबसे खूबसूरत परिदृश्यों में से एक है, जहां प्रकृति ने कई उपहार दिए हैं। यहां बारिश भी है और धूप भी। धुएं से ढंकी पहाड़ियों और बादलों का कभी खत्म न होने वाला सिलसिला और हरियाली से आच्छादित जंगल आपकी कल्पनाओं में रच-बस जाएंगे। यहां की रंगीन जनजातियां इस आकर्षण को और बढ़ाने एवं आपके स्वागत सत्कार के लिए हमेशा तैयार खडी हैं।
















सत्य की खोज

2 comments:

  1. दस दिन भी कम है जगह को महसूस करने के लिए और सोहरा में घूम कर मन अलग ही एहसास में खो जाता है

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